Monday, September 12, 2022

Socha Na Tha


सोचा ना था 

सोचा ना था 
यु कही राहों में, मिल जाओगे तुम...
मेरी तनहयों को तनहा कर जाओगे तुम...

वह पहली नज़र तुम्हारी, याद आएगी यु...
दिल को मेरे उड्डा ले जाएगी यु...

बातें तुम्हारी मान में घर कर जाएगी यु...
यादें तुम्हारी मुझको मुझसे ही चीन ले जाएगी यु...

वह वक़्त जो साथ चले थे हम, थम्म जायेगा यु...
के अकेले चलते हुए भी, साथ हो तुम ये एहेसास दिलाओगे तुम...

सोचा ना था...

सोचा ना था...


Na Jane Kyu ?

"Na Jane kyu"


शाम ढलते ही,
तन्हाई बढ़ती है,
एक चुप्पी-सी होंठो पे चढ़ती है,
फिर तुम्हारी याद, 
दिल के कमरों से निकलती है,
आखों तक आते ही, पीघल  जाती है.
न जाने क्यों ये शामे आती है ?

अँधेरा छा जाता है, राते आती है,
आख़े बंद कर मैं तुम्हारे ख़यालों में खोती हूँ;
और न जाने कब सपनो की दुनीया में कदम रख दिया करती हूँ I
वहाँ मैं तुम्हे ही ढूँढा करती हूँ ,
तुम्हारी झलक के लिए तरस जाया करती हूँ,
फिर तुम्हारी परछाई देख डर के छुप जाया करती हूँ,
न जाने क्यों सपनों में भी नादानियां करती हूँ ,
न जाने क्यों ये राते आती है ?

सुबह होते ही, आख खुलती है,
चिड़िया आ मेरे खिड़की पे चेहेक्ती है ,
ऐसा लगता है मुझे वोह छेड़ा करती है ,
कभी तुम्हारा तो कभी मेरा नाम पुकारा करती है ,
न जाने क्यों ये सुबह होती है ?
दिन भर तुम्हे ही मैं ढूँढा करती हूँ ,
कही तो नजर आ जाओगे यही सोचा करती हूँ ,
फिर भी नज़र जब तुम नहीं आते हो ,
आख़े बंद कर, पल्खों में छिपी तुम्हारी तस्वीर देख लिया करती हूँ I

न जाने क्यों, ये दिन काटने पड़ते है I
न जाने क्यों बिन तुम्हारे जीना पड़ता है ?
न जाने क्यों ?
न जाने क्यों ?